जंतर-मंतर रैली में अरविंद केजरीवाल का बड़ा हमला, क्लीन चिट के बाद पहली जनसभा में केंद्र सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर मंतर पर रविवार, 1 मार्च 2026 को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और अरविंद केजरीवाल ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। यह रैली उस समय आयोजित हुई जब उन्हें दिल्ली एक्साइज नीति (शराब नीति) मामले में अदालत से क्लीन चिट मिली है। राजनीतिक दृष्टि से इस रैली को आम आदमी पार्टी (AAP) का बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।
रैली में भारी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। पंजाब, गुजरात और अन्य राज्यों से भी पार्टी के प्रतिनिधि पहुंचे। मंच से केजरीवाल ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “आज से बीजेपी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।” उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को साजिश करार देते हुए कहा कि न्यायालय का फैसला सच्चाई की जीत है।
इस अवसर पर केजरीवाल ने दिल्ली में विभिन्न मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने बस मार्शलों, डीटीसी कर्मचारियों और मोहल्ला क्लिनिक से जुड़े कर्मचारियों के मुद्दों को प्रमुखता से रखा। उनका कहना था कि सरकार को आम कर्मचारियों और मध्यम वर्ग की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रहे हैं।
रैली में मौजूद नेताओं ने इसे आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को गर्माने वाली सभा बताया। पार्टी नेताओं के अनुसार, यह केवल एक धन्यवाद सभा नहीं थी, बल्कि जनता के बीच जाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का प्रयास भी था। रैली के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और दिल्ली पुलिस की निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली आने वाले समय में दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव डाल सकती है। केजरीवाल ने अपने भाषण में शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी जैसे मुद्दों को भी दोहराया और दावा किया कि उनकी सरकार ने दिल्ली में ऐतिहासिक काम किए हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे “ईमानदार राजनीति” का समर्थन करें।
कुल मिलाकर, जंतर-मंतर की यह रैली आम आदमी पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण साबित हुई। अदालत से राहत मिलने के बाद केजरीवाल का यह पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम था, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस रैली के राजनीतिक परिणाम और प्रभाव पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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