🌦️मार्च 2026 में बदला मौसम का मिजाज: उत्तर में बर्फबारी, दक्षिण में ओलावृष्टि और कई राज्यों में अलर्ट
भारत में इस समय मौसम ने ऐसा रुख अपनाया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। आमतौर पर मार्च का महीना सर्दी से गर्मी की ओर बढ़ने का समय होता है, लेकिन इस बार देश के कई हिस्सों में मौसम ने पूरी तरह से उलटफेर कर दिया है। कहीं बर्फबारी हो रही है तो कहीं ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का दौर जारी है।
उत्तर भारत के Jammu and Kashmir में मार्च के अंत में भी ताजा बर्फबारी देखने को मिली है। यह स्थिति असामान्य मानी जा रही है, क्योंकि इस समय तक तापमान बढ़ने लगता है। इस अचानक बदले मौसम ने स्थानीय जीवन और पर्यटन दोनों को प्रभावित किया है। जहां एक ओर पर्यटक बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं, वहीं स्थानीय लोगों को ठंड और यातायात में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं दक्षिण भारत के Karnataka में तेज ओलावृष्टि ने लोगों को चौंका दिया। कई जगहों पर ओले इस कदर गिरे कि नजारा बर्फबारी जैसा लगने लगा। हालांकि इस प्राकृतिक घटना का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
भारत में मौसम का बड़ा उलटफेर: Jammu and Kashmir में बर्फ, Karnataka में ओले, कई इलाकों में तूफान का खतरा
पूर्वी भारत में भी मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। Kolkata सहित कई इलाकों में भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। तेज हवाओं, गरज-चमक के साथ बारिश और तूफान की चेतावनी दी गई है। ऐसे हालात में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे जलभराव, ट्रैफिक जाम और अन्य परेशानियां बढ़ सकती हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस असामान्य बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और जलवायु परिवर्तन मुख्य कारण हैं। समुद्री तापमान में बदलाव और वायुमंडलीय दबाव की स्थिति भी इसमें भूमिका निभा रही है। यही वजह है कि पारंपरिक मौसम चक्र अब उतना स्थिर नहीं रहा।
इस बदलते मौसम का असर कई क्षेत्रों पर पड़ रहा है। खेती-किसानी को नुकसान हो रहा है, यात्रा और परिवहन प्रभावित हो रहे हैं, और अचानक तापमान में बदलाव से लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।
सरल शब्दों में कहें तो मार्च 2026 में मौसम ने अपने तय नियमों को तोड़ दिया है। जहां गर्मी आनी चाहिए थी, वहां सर्दी और बारिश का मिश्रण देखने को मिल रहा है। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव की ओर इशारा करती है और भविष्य के लिए चेतावनी भी देती है।
