सड़कचीन से तानातनी के बाद भारत ने सीमाओं पर अपनी चौकसी मजबूत करनी सुरु कर दी हैं और चीन के कड़े विरोध के बाद भी सीमा सड़क संगठन द्वारा जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में मोटर वाहन चलने लायक दुनिया की सबसे ऊंची सड़क बनाई हैं जहा का तापमान सामान्य दिनों मे शून्य से १५-२० डिग्री सेल्सियस कम रहता हैं जबकि सर्दियों में यह शून्य से ४०-४५ डिग्री नीचे चला जाता हैं और इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य स्थानों से ५० फीसदी कम रहती हैं.

साथ ही यहाँ पर मशीनों और मानव शक्ति की क्षमता विषम जलवायु और कम ऑक्सीजन के चलते ५० फीसदी कम हो जाती हैं क्योंकि यह सड़क १९,३०० फुट से अधिक ऊंचाई पर स्थित ‘उमलिंगला टॉप’ से होकर गुजरती हैं. बीआरओ की ‘हिमांक परियोजना’ के तहत यह कामयाबी हासिल की गई. यह लेह से २३० किमी दूर हानले के पास स्थित हैं. चिसुमले और देमचक गांवों को जोड़ने वाली ये ८६ किमी लंबी सड़क रणनीतिक महत्व की हैं. ये गांव पूर्वी क्षेत्र में भारत-चीन सीमा से महज कुछ ही दूरी पर स्थित हैं. जानकारों का कहना हैं कि इस सड़क से चीन की हरकतों पर सीधी नज़र रखी जा सकेगी.

बता दें कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने पहले ही चीन सीमा पर सड़कों के निर्माण में हो रही देरी पर चिंता जाहिर कर चुका हैं. कैग की आपत्ति के बाद रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सीमा से सटी सड़कों के निर्माण के लिए बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन को और अधिकार दिए थे. इस कठिन कार्य को करने को लेकर बीआरओ कर्मियों की सराहना करते हुए परियोजना के चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर डीएम पुरवीमठ ने कहा कि इतनी अधिक ऊंचाई पर सड़क बनाना चुनौतियों से भरा हुआ था. उन्होंने कहा कि इस स्थान की जलवायु निर्माण गतिविधियों के लिए हमेशा ही प्रतिकूल रहती हैं| खबर जी न्यूज़

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