सऊदी

सभी जानते हैं की सऊदी अरब की कानून व्यवस्था काफी सख्त हैं और इसी लिहाज से सऊदी अरब ने अपने यहां जारी सुधारों को आगे बढ़ाते हुए अब महिलाओं के लिए भी सेना में नौकरियों का दरवाज़ा खोल दिया हैं. ये नौकरियां स्वैच्छिक होंगी, यानी महिलाओं के लिए सेना में जाना अनिवार्य नहीं होगा. सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक, जन सुरक्षा निदेशालय ने रविवार को सैन्य पदों पर भर्ती की राह खोल दी. इन महिलाओं को रियाद, मक्का, मदीना, क़ासिम, असिर, अल-बहा और शरक़ियाह में नियुक्त किया जाएगा. इसके लिए ज़रूरी योग्यताओं में महिला को सऊदी मूल का होना ज़रूरी हैं और शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल डिप्लोमा से कम नहीं होनी चाहिए.

२५ से कम और ३५ साल से अधिक उम्र की महिलाएं इसके लिए आवेदन नहीं कर सकेंगी. यह उन तमाम सामाजिक सुधारों की कोशिशों में से एक हैं, जो क्राउन प्रिंस मोहम्मद सलमान की अगुवाई में किए जा रहे हैं. सऊदी शूरा काउंसिल के एक सदस्य की ओर से यह प्रस्ताव लाया गया था कि महिलाओं के लिए साल में तीन महीने सेना में काम करना अनिवार्य कर दिया जाए. लेकिन इस पर काउंसिल के भीतर और सोशल मीडिया में तीखे मतभेद सामने आए थे. इसी साल जून महीने से महिलाओं को पहली बार कार चलाने की इजाज़त भी मिल जाएगी. बीते साल सितंबर में यह पाबंदी हटाने का ऐलान किया गया था.

साथ ही महिलाओं को अब सार्वजनिक तौर पर स्टेडियम में बैठकर फुटबॉल मैच देखने की भी इजाज़त हैं. दिसंबर में ही सिनेमा पर दशकों पुरानी पाबंदी भी हटा ली गई थी, ताकि क्राउन प्रिंस के विज़न के लिहाज़ से मुल्क़ के मनोरंजन उद्योग में तेज़ी लाई जा सके. सऊदी अरब का शाही परिवार और धार्मिक प्रतिष्ठान ‘वहाबियत’ का पालन करता हैं, जिसमें महिलाओं के लिए इस्लामी नियम काफी सख़्त हैं. सऊदी अरब में महिलाओं को अकेले सफ़र करने की इजाज़त नहीं हैं. इस दौरान उनके साथ परिवार का एक पुरुष सदस्य होना ज़रूरी हैं. ज़्यादातर रेस्तरां और कैफे में दो सेक्शन होते हैं. एक पुरुषों के लिए और दूसरा परिवारों के लिए. महिलाओं को परिवारों वाले सेक्शन में ही पति या परिवार के साथ बैठने की इजाज़त होती हैं| खबर बीबीसी

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