नीतीशमीडिया को दिए बयान में लालू ने कहा था कि नीतीश ने अचानक फैसला ले लिया और इसमें नीतीश की बीजेपी के साथ फिक्सिंग थी लेकिन नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होने के पहले राजद सुप्रीमो लालू यादव से फोन पर बात की और नीतीश ने लालू यादव को अपने फैसले से अवगत करा दिया क्योंकि महागठबंधन की सरकार में आरजेडी सबसे बड़ा दल था इसलिए नीतीश ने सबसे पहले लालू यादव को अपना फैसला बताया था

और लालू ने नीतीश को अपने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए भी कहा था. तो २६ जुलाई बुधवार की शाम को इस्तीफा देने से पहले नीतीश कुमार ने लालू यादव से क्या कहा सूत्रों के हवाले से आई खबर के अनुसार नीतीश कुमार ने महागठबंधन के सीएम के रूप में इस्तीफा देने से पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को फोन लगाया और कहा “लालू जी, मुझे माफ कर दीजिए क्योंकि २० माह तक सरकार चलाने के बाद मैं इसे अब और नहीं चला सकता. मैं अपना पद छोड़ने जा रहा हूं.

हालांकि लालूयादव ने उन्हें अपने फैसले पर विचार करने के लिए भी कहा फिर लगभग आधा घंटे के बाद सभी न्यूज चैनलों पर यह खबर प्रसारित हो गई कि नीतीश कुमार ने लालूयादव और कांग्रेस से नाता तोड़ लिया और बाद में तस्वीर सामने आई कि जेडीयू, बीजेपी के सहयोग से सरकार बनाने जा रही हैं और अगले दिन २७ जुलाई को नीतीश कुमार ने बीजेपी के समर्थन से छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और २८ जुलाई शुक्रवार को बिहार विधानसभा में अपना बहुमत भी साबित कर दिया.

इस दौरान दोनों ही पक्षों से बयानों के तीर चले और एक-दूसरे पर आरोपों का सिलसिला अब तक जारी हैं. लालूयादव के बेटे और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने तो नीतीश कुमार पर सीधा हमला करते हुए उन्हें चुनौती तक दे दी थी कि अगर नीतीश कुमार में हिम्मत होती तो मुझे सीधे बर्खास्त करते. नीतीश कुमार ने महागठबंधन को धोखा देने का काम किया हैं| खबर जी न्यूज़

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