हाफिज सईद

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद व जमात-उद-दावा के मुखिया हाफिज सईद ने शनिवार को ऐलान किया कि पाकिस्तान में अगले साल होने वाला असेंबली चुनाव वह लड़ेगा. यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस आतंकी ने बताया कि वह मिल्ली मुसलिम लीग पार्टी से चुनाव लड़ेगा. हालांकि उसने अभी यह खुलासा नहीं किया कि वह कहां से चुनाव लड़ेगा. हाफिज ने अगस्त में ही ‘मिल्ली मुस्लिम लीग’ पार्टी का गठन किया था. उसने जमात-उद-दावा के ही पुराने सदस्य सैफुल्ला खालिद को पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया हैं.

कुछ माह पहले ही हाफिज ने अपने संगठन जमात-उद-दावा की ओर से पाकिस्तान चुनाव आयोग में ‘मिल्ली मुस्लिम लीग’ के नाम से राजनीति पार्टी को मान्यता देने के लिए अर्जी दी थी. पार्टी गठन के दौरान ही हाफिज ने कहा था कि वो कश्मीर का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाएगा. ३१ जनवरी २०१७ को हाफिज को नजरबंद किया गया था. तकरीबन १० महीने की नजरबंदी के बाद २४ नवंबर को उसे रिहा कर दिया गया था. रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल अशोक कुमार मेहता ने समाचार चैनल आजतक से बातचीत में कहा कि हाफिज की रिहाई और कश्मीर में आतंकियों के सफाये के बीच सीधा कनेक्शन हैं. मेहता ने कहा कि भारतीय सेना के ऑपरेशन ऑल आउट से आतंकियों में खलबली मची हुई हैं. इसी के चलते पाकिस्तान सरकार और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई  ने आतंकियों का हौसला बढ़ाने के लिए आतंकी हाफिज सईद की रिहाई की हैं.

मेजर जनरल मेहता ने कहा कि वैसे भी पाकिस्तान में हाफिज सईद की नजरबंदी महज एक दिखावा ही थी. पाकिस्तान सरकार ने दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए यह कदम उठाया था. मेहता ने कहा कि अगर पाकिस्तान सरकार हकीकत में हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करने की इच्छुक होती, तो उसको अब तक मुंबई आतंकी हमले समेत किसी भी मामले में दोषी ठहरा दिया जाता. अब जब कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के पैर उखड़ने लगे हैं, तो पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने हाफिज सईद को रिहा करने का दांव चला और नजरबंदी से रिहा होते ही जिस तरह से हाफिज सईद ने कश्मीर राग अलापा और भारत के खिलाफ जहर उगला, उससे उसके मंसूबे साफ हैं| खबर आजतक

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