महाराजा

पंजाब के पूर्व महाराजा दिलीप सिंह की अस्थियों को ब्रिटेन से भारत लाने के लिए कांग्रेस केंद्र सरकार से कर रही हैं मांग. कांग्रेस के राज्य सभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की. बाजवा ने कहा कि पीएम को इस मामले में हस्तक्षेप करके पूर्व महाराजा के अवशेषों को भारत लाने में मदद करनी चाहिए. उन्होंने पीएम को इस आशय की चिट्ठी भी सौंपी हैं.

बाजवा ने अपनी चिट्ठी में लिखा की दुनिया भर के सिख समुदाय की मांग हैं कि महाराजा दिलीप सिंह के अवशेषों को भारत लाया जाए. पंजाब के पूर्व महाराजा दिलीप सिंह महाराजा रंजीत सिंह के सबसे छोटे बेटे थे. अंग्रेजों ने जब २९ मार्च १८४९ में पंजाब को अपने अधीन लिया उसके बाद महाराजा दिलीप सिंह को १५ साल की उम्र में ही ब्रिटेन भेज दिया गया था.

उन्हें शुरुआती पांच सालों के दौरान अपनी मां से भी नहीं मिलने दिया गया था. १५ साल की उम्र में ही उन्हें ईसाई धर्म स्वीकार करवा दिया गया था. बाजवा की चिट्ठी में लिखा हैं, ‘१८६१ में अपनी मां से मिलने के बाद दिलीप सिंह को सिख साम्राज्य की समृद्ध विरासत के बारे में पता चला. अपनी मां की मौत के बाद उन्होंने भारत आने की इजाजत मांगी. सिख धर्म को फिर से खड़ा करने की उनकी कोशिशों को अंग्रेजों ने विद्रोह माना.’

२२ अक्टूबर १९८३ को ५५ साल की उम्र में उनका पैरिस में निधन हो गया था. उन्हें ब्रिटेन में ईसाई रीतियों के मुताबिक दफना दिया गया था. कांग्रेसी सांसद बाजवा ने पीएम को खत में लिखा हैं, ‘महाराजा दिलीप की भारत में अंतिम संस्कार की आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि अंग्रेजों को इससे विद्रोह फैलने का खतरा था.

इसलिए मैं आपसे अपील करता हूं कि उनकी कब्र को खुदवा कर शव को निकाला जाए और उनके अवशेषों को भारत में लाया जाए.’ बाजवा ने कहा हैं कि महाराजा दिलीप सिंह का अंतिम संस्कार सिख रीति-रिवाजों के अनुसार होना चाहिए. उन्होंने कहा हैं कि यह पंजाब के लोगों के लिए भावनात्मक विषय हैं| खबर आजतक

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