वंदे मातरम्कल परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने ‘वंदे मातरम्’ नामक पुस्तक का विमोचन किया. इस पुस्तक में वंदे मातरम् के सृजन से लेकर विभिन्न चरणों में इसकी विकास यात्रा का पता लगाया गया हैं और इस अवसर पर डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के राष्ट्रवादी लोकाचार का प्रतीक हैं और इसे किसी एक धर्म अथवा पंथ के साथ जोड़ना पूरी तरह से गलत हैं.

मंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् को सबसे पहले दशक १८७० में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित कविता के रूप में जाना जाता था, जिसे बाद १८८१ में उनके द्वारा लिखित उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया. परंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यह हैं कि २०वीं शताब्दी की शुरुआत में इस गीत के कई छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया और बाद में यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए एक अत्यंत लोकप्रिय गीत बन गया.

वंदे मातरम् को एक प्रतीक के रूप में व्याख्यायित किया जा सकता हैं, जो भारत के विभिन्न राज्यों, धर्मों और विश्वासों को मानने वाले लोगों को एकता के सूत्र में बांधता हैं और उन्हें एक साथ आकर मां भारती की सेवा एवं रक्षा करने के लिए प्रेरित करता हैं. इस पुस्तक को अखिलेश झा और रश्मिता झा ने लिखा हैं

और यह पुस्तक विशेष रूप से संविधान सभा और भारतीय संसद की कार्यवाही के दौरान वंदे मातरम् के संदर्भों पर केंद्रित हैं, और पिछले १५० वर्षों के दौरान विभिन्न ध्वनियों एवं ग्रामोफोन में रिकॉर्ड किए गए वंदे मातरम् के विभिन्न संगीत संस्करणों का पता लगाती हैं|

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