अमेरिका ने कल की शाम अफगानिस्तान के नानागढ़ में आईएसआईएस के ठिकानों को तबाह करने के लिए दुनिया के सबसे बड़े बम का इस्तेमाल किया सीरिया में अमेरिका द्वारा गिराए जा रहे बमों से २१ गुना ज्यादा वजनी है ये बम। फटने के बाद इसकी गंध ३२ किमी. दूर तक आती है। इससे १.५ किमी. तक का एरिया तबाह किया जा सकता है और बम गिरने के कारण उस जगह ३०० मीटर चौड़ा तक का गड्ढा हो जाता है। अफगानिस्तान के नानागढ़ प्रोविन्स के जिस जिले में बम गिरा वहां से पाकिस्तान की तोरहाम बॉर्डर की दूरी ६० किमी की है। इस बम का नाम जी.बी.यू. ४३ हैं    
bombकैसा है ये बम…
– जी.बी.यू. ४३ को मेसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट बॉम्ब (एम.ओ.ए.बी.) भी कहा जाता है। एम.ओ.ए.बी. को कुछ एक्सपर्ट्स ‘मदर ऑफ ऑल बाॅम्ब’ भी कहते हैं। न्यूक्लियर के बाद ये दुनिया का सबसे पावरफुल ट्रेडिशनल बम है।
– इसका वजन लगभग दस हजार किलोग्राम के है। इसमें ८,१६४ किलोग्राम एक्सप्लोसिव भरा होता है। टीएनटी एक्सप्लोसिव
की तुलना में ये उससे ११ गुना ज्यादा ताकतवर है। करीब डेढ़ मील दायरे में आने वाली चीजों को तबाह कर सकता है।
– यूएस एयरफोर्स की स्पेशल एक्सप्लोसिव यूनिट ने इसे पहली बार साल २००२ में तैयार किया माना जाता है कि अमेरिकी एयरफोर्स इस बम को इराक में इस्तेमाल करना चाहती थी लेकिन तब की एडमिनिस्ट्रेशन ने इसकी इजाजत नहीं दी
bombएक बम की कीमत व क्षमता 
एक बम की कीमत १०३ करोड़ रुपए है।
– लेंथ : ९ मीटर
– ब्रिथ : १ मीटर
– विस्फोटक : ११ टन एच-६, टीएनटी और एल्युमीनियम
– रेंज : गिरने वाली जगह से १.५ मील तक की तबाही
कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये बी.एल.यू.-८२ का विकल्प है। इसका इस्तेमाल वियतनाम जंग और फिर अफगानिस्तान में भी कई जगह किया जा चुका है अमेरिका के पूर्व डिफेंस सेक्रेटरी डोनाल्ड रूम्सफील्ड के मुताबिक हमने ये बम सायकोलॉजिकल ऑपरेशंस के तौर पर डेवलप किया था इसका मकसद था सद्दाम हुसैन को डराना इसके टेस्ट का वीडियो इसलिए ही जारी किया गया ताकि इराक के लोग (खास कर सद्दाम हुसैन के समर्थक) डर जाएं | खबर दैनिक भास्कर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here