ये वो इंदिरा गांधी नहीं जिन्हें देश आयरन लेडी के नाम से जनता था, जिन्होंने भारत के प्रधानमंत्री पद पर रह अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वाहन किया और एक दिन पंचतत्व में विलीन हो गई पर यहां इंद्रा गांधी के नाम का तात्पर्य बिहार स्थित डालमियानगर के छोटे से सहर की रहने वाली उस महिला से हैं जो ता उम्र लोगो के यहाँ झाड़ू पोछा करते हुए एक दिन स्वर्ग सिधार गई बहरहाल मामला कुछ यूं हैं की लोगो के यहाँ झाड़ू बर्तन करने वाली इंद्रा गांधी की बेटी और नातिन भी इसी पेसे में थी और लोगो के यहाँ काम कर अपना गुजारा करती थी पर इस बढ़ती महँगाई ने किसे बख्शा हैं
इसकी मार उन लोगो पर कुछ ज्यादा ही पड़ी पैसे की कमी और भूख के कारण उन लोगो ने ब्याज पर पैसा लेना सुरु किया और कुछ दिनों तक तो सब सही बिता पर धीरे धीरे देनदारों का कहर बढ़ता गया वो देनदार जो लोग चंद रुपयों की लालच में ग़रीब लोगों को भारी मासिक ब्याज दरो पे पैसा दे अपने लिए एक मोटी रकम बंनाने का काम करते हैं इन्ही रकमो के बोझ तले दबे स्वर्गवासी इंद्रा गांधी के परिवार को कल रातो रात अपना घर छोड़ भागने पर विवश होना पड़ा सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक उनके आस पड़ोस के लोगो का कहना हैं कि इंद्रा गांधी जो लोगो के यहाँ काम किया करती थी
उनका दामाद जो एक ट्रक चालक था वो आधी रात ट्रक लाया और घर के सारे समान सहित वो लोग चम्पत हो गए और भागने के कुछ घंटों पहले सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली इंद्रा गांधी की नातिन ने अपनी एक सखी को बाय-बाय कहा और कहा की अब वो दुबारा यहाँ किसी से नहीं मिलेगी हालांकि अब तक आधिकारिक रूप से इसकी कोई पुष्टि नहीं कि गई हैं ना ही कही कोई मामला दर्ज हुआ वही एक तरफ ब्याज पर पैसा देने वाले लोगो की हवा टाइट हैं और कुछ देनदार तो उनके पड़ोसियों को भी इंद्रा गांधी परिवार द्वारा लिए गए पैसों के लिए तंग कर रहे हैं और अब वो ग़रीब लोग भी परेशान हैं जिन्होंने ने उनके ही जरिए से समूह में खुद के लिए भी क़र्ज़ लिए थे |

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