राधा मोहन सिंहकल नई दिल्ली के पूसा में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के ८९वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत दलहन और तिलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाएगा. सरकार इनका उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर गुणवत्ता के बीज और तकनीक के उपयोग को लेकर कदम उठा रही हैं

घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में अभी ५० लाख टन दाल और १.४५ करोड़ टन वनस्पति तेल जिसमे खाद्य और अखाद्य दोनों प्रकार के हर साल आयात किए जाते हैं राधा मोहन सिंह ने कहा कि सरकार न केवल उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठा रही हैं बल्कि कृषि को आय-केंद्रित बनाने के लिए भी प्रयासरत हैं और यह २०२२ तक किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य का हिस्सा भी हैं

राधा मोहन सिंह ने आइसीएआर के वैज्ञानिकों से इस लक्ष्य को पाने की दिशा में काम करने का आह्वान करने के साथ ही फसल की उपज और कृषि आय बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र में कौशल विकास पर भी जोर दिया. भारत की जीडीपी में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों की हिस्सेदारी १८% हैं. कृषि मंत्री बोले कि हरित क्रांति ने भारत को गेहूं और चावल में आत्मनिर्भर बनाने में मदद की लेकिन, देश अब भी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए दलहन और तिलहन का आयात कर रहा हैं और इसमें भारी मात्र में विदेशी मुद्रा खर्च होती हैं

राधा मोहन सिंह के मुताबिक, वर्ष २०१६-१७ में फसल में दालों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था और इस वर्ष बुवाई क्षेत्र भी ज्यादा हैं देश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा हैं और अगले दो-तीन वर्षों में हम दालों में आत्मनिर्भर हो जाएंगे| खबर दैनिक जागरण

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here