उपचुनाव

पिछले २९ साल से गोरखपुर की संसदीय सीट गोरखनाथ मठ में ही रही हैं. ये बीजेपी का मजबूत दुर्ग हैं. १९८९ से इस सीट पर गोरखनाथ मंदिर से जुड़ी हस्तियां ही जीत का भगवा ध्वज फहरा आ रहा हैं. लेकिन इस बार हुए उपचुनाव में चाहे बीजेपी उम्मीदवार जीते या सपा, एक बात तय हैं कि इस बार क्षेत्र का सांसद मठ से बाहर का होगा. इतना ही नहीं वो गैर-राजपूत भी होगा. योगी आदित्यनाथ पिछले पांच बार से गोरखपुर से सांसद रहने के बाद पिछले साल यूपी के सीएम बने और यहां की लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.

योगी की कर्मभूमि गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए बीजेपी ने उपेंद्र शुक्ला को मैदान में उतारा हैं. बीजेपी को मात देने के लिए बसपा समर्थित सपा उम्मीदवार प्रवीण निषाद हैं. वहीं कांग्रेस ने सुरहिता करीम को टिकट दिया हैं. इस बार सभी उम्मीदवार मठ के बाहर के हैं. आजादी के बाद पहली बार १९५२ में लोकसभा चुनाव हुआ तो कांग्रेस ने जीत दर्ज थी. इसके बाद १९६७ तक ये सीट कांग्रेस के पास रही,

लेकिन १९६७ में हुए चौथे लोकसभा चुनाव में गोरखनाथ मंदिर से मंहत दिग्विजयनाथ ने निर्दलीय रूप में जीत दर्ज की. इसके बाद १९७० में मंहत अवैद्यनाथ ने ये सीट जीती. १९७१ में कांग्रेस ने फिर वापसी, लेकिन १९७७ में फिर लोकदल के हरिकेश बहादुर से उसे मात मिली. हालांकि हरिकेश ने जीत के बाद  कांग्रेस का दामन थाम लिया. १९८४ में कांग्रेस के मदन पाण्डेय ने यहां से आखिरी बार जीत दर्ज की. इसके बाद आज तक कांग्रेस पार्टी वापसी नहीं कर सकी हैं| खबर आजतक

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