ग्रेच्युटी लोकसभा में पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी अमेंडमेंट बिल का भुगतान और स्पेसिफिक रिलीफ अमेंडमेंट बिल जैसे दो महत्वपूर्ण विधेयकों को आज मंजूरी दे दी गई. लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी माना कि इन बिलों पर चर्चा होनी चाहिए विशेषकर पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी अमेंडमेंट बिल पर लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण उन्होंने श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार को इस बिल के अमेंडमेंट को मंजूरी दे दी.

अन्य बातों के बीच यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सशक्त बनाते हुए यह चिन्हित करता हैं कि लगातार अपनी सेवाएं देने के एवज में वह कितनी अवधि तक के लिए मातृत्व अवकाश पाने की योग्यता रखता हैं और यह कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की राशि का निर्धारण भी करता हैं. एक्ट १९६१ के तहत मैटर्निटी लीव की अधिकतम सीमा १२ हफ्तों की थी लेकिन अब मैटर्निटी बेनिफिट एक्ट २०१७ के तहत इसे बढ़ाकर २६ हफ्ते कर दिया गया हैं.

इस बिल में १९७२ के अधिनियम में १२ सप्ताह के संदर्भ को हटा दिया गया हैं और केंद्र सरकार के कर्मचारियों को अधिक मैटर्निटी लीव की सुविधा देकर सशक्त किया गया हैं. १९६१ एक्ट के मुताबिक कर्मचारियों को दी जाने वाली अधिकतम ग्रेच्युटी की सीमा १० लाख निर्धारित थी, लेकिन अब इस सीमा को हटा दिया गया हैं

और इसमें कहा गया हैं कि इसकी सीमा को केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित किया जा सकता हैं. बिल में संशोधन के बाद अब प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को २० लाख रुपए तक टैक्स फ्री ग्रेच्युटी मिला सकेगी. वहीं केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पहले ही २० लाख रुपए तक टैक्स् फ्री ग्रैच्युटी का प्रावधान हैं| खबर नई दुनिया

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