सरकार की किसान विरोधी नीतियां और तमाम समस्याओं से तंग आकर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसान सड़कों पर उतर आए हैं इस बीच दोनों सरकारों और किसान संगठनों में सुलह की भी खबरें आईं, लेकिन फिर आंदोलन में फूट पड़ गई और दूसरे धड़ों ने आंदोलन जारी रखा बल्कि आंदोलन और तेज होता दिख रहा है महाराष्ट्र के किसानों ने फसल खराब होने के कारण कर्ज माफी तथा एमएसपी की गारंटी सहित विभिन्न मांगों के लिए एक जून को आंदोलन शुरू किया महाराष्ट्र के किसानों ने देवेंद्र फडणवीस सरकार के खिलाफ ‘किसान क्रांति’ नाम से आंदोलन शुरु किया है |

तो मध्यप्रदेश में भी किसानों ने अपनी मांग लेकर १ से १० जून तक मंडियों को माल न पहुंचाने का आंदोलन शुरु कर दिया और आंदोलन कर रहे किसानों ने अहमदनगर जिले में बड़ी मात्रा में दूध हाईवे पर बहा दिया वहीं किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन जारी रखेंगे महाराष्ट्र में किसान आंदोलन की शुरुआत अहमद नगर जिले में गोदावरी नदी के किनारे बसे पुणतांबा गांव से हुई

किसानों की मांगें
- किसानों के सभी कर्ज माफ किए जाएं
- स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाए
- खेती के लिए बिना ब्याज के कर्ज दे सरकार
- ६० साल के उम्र वाले किसानों को पेंशन दिया जाए
- दूध के लिए प्रति लीटर ५० रुपये मिले

शुक्रवार की रात किसान नेताओं से बात करने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने शनिवार को ऐलान किया था कि उनकी सरकार कम जमीन वाले किसानों का कर्ज माफ करेगी उन्होंने कहा कि इस कदम से विदर्भ और मराठवाड़ा के ऐसे ८० फीसद किसानों को लाभ मिलेगा सीएम से समझौते के बाद पुणतांबा के किसानों की कोर कमिटी द्वारा हड़ताल वापस लेने का ऐलान किया गया, लेकिन सोमवार को महाराष्ट्र बंद की पुकार के साथ किसान फिर से एकजुट हुए इस आंदोलन में फूट पड़ गई किसानों के आंदोलन की आगे की नीति तय करने के लिए नासिक में किसानों के नेताओं की सभा हुई

जिसमें आज ५ जून को महाराष्ट्र बंद रखने का निर्णय लिया हुआ किसानों द्वारा सोमवार को महाराष्ट्र बंद करने की घोषणा की गई सोमवार को कई जगहों पर सब्जियों से भरी गाडि़यों को रोक कर उनमें भरी सब्जियों को सड़कों पर फेंक दिया गया और दूध की गाड़ियों को भी रोक कर सड़क पर दूध बहाया गया | खबर आजतक

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