दिग्विजयकल बुधवार को संसद की स्थाई समिति के सामने पेश हुए रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल तब चुप पड़ गए जब कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उनसे पूछा कि क्या वह २०१९ तक भी बता पाएंगे कि नोटबंदी के बाद बैंकों में कितनी पुरानी करेंसी जमा हुई हैं रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल मंगलवार को दूसरी बार वित्त मामलों की संसद की स्थाई समिति के सामने पेश हुए और उन्होंने गोपनीयता का हवाला देते हुए बैंकों के डिफॉल्टरों के नाम बताने से भी इनकार कर दिया.

नोटबंदी के ८ महीने बाद भी रिज़र्व बैंक देश को ये बताने में असमर्थ रहा कि ५०० और एक हज़ार रुपये की कितनी करेंसी बैंकों में जमा हुई हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जब नोटबंदी से जुड़े सवाल पूछे गए तो रिज़र्व बैंक के गवर्नर ज्यादातर सवालों के जवाब नहीं दे पाए और उन्होंने जानकारी की कमी और गोपनीयता का हवाला दिया. सूत्रों के मुताबिक, जब नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा हुई पुरानी करेंसी के बारे में पूछे जाने पर पटेल ने बताया की

  1. पुरानी करेंसी को गिनने का काम चल रहा है.
  2. इसके लिए नोट गिनने की और मशीनें खरीदी जा सकती हैं.
  3. भारत के बाहर नेपाल जैसे देशों में कितनी पुरानी करेंसी जमा हुई पता नहीं.
  4. सहकारी बैंकों में जमा पैसे का हिसाब भी नहीं है.

सरकार ने पिछले साल करीब १५ लाख करोड़ की करेंसी का विमुद्रीकरण किया था. जब सरकार ये बताएगी कि कितना पैसा वापस बैंकों के पास आया, उससे पता चलेगा कि क्या असल में कालेधन पर चोट हुई या नहीं लेकिन सरकार ८ महीने बाद भी आंकड़े नहीं साफ़ कर पाई, जिससे ये सवाल उठ रहा हैं कि क्या असल में नोटबंदी कालेधन या भ्रष्टाचार को रोकने में नाकामयाब रही हैं वित्त मामलों के जानकार सुयश राय का कहना हैं कि जो कारण रिज़र्व बैंक के गवर्नर बात रहे हैं वह काफी पुराने हैं और इन्हें पचाना मुश्किल हैं| खबर एनडी टीवी इंडिया

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