हाईकोर्टदिल्ली हाईकोर्ट ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर कॉपीराइट मामले में २० हजार का जुर्माना लगाया हैं और इसे लेकर बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने शनिवार को नीतीश कुमार पर तंज कसा उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट ने उनपर जुर्माना ठोंका होता तो सीएम नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांग लेते, लेकिन अब उनकी नैतिकता कहां गई? बता दें कि जेएनयू के पूर्व रिसर्च स्कॉलर ने कॉपीराइट एक्ट के वॉयलेशन के मामले में नीतीश के खिलाफ हाईकोर्ट में केस दायर किया था उनपर आरोप हैं कि उनके रिसर्च पेपर चोरी कर सीएम के नाम से किताब छापी गई. 

तेजस्वी ने ट्विटर पर लिखा- ”मुख्यमंत्री जी बताएं, किसी स्टूडेंट का रिसर्च पेपर अपने नाम से छापना कौन-सी नैतिकता हैं? अपनी सहूलियत के हिसाब से नैतिकता का पैमाना तय करने पर आपकी अंतरात्मा क्या कहती हैं? अगर कोर्ट २० हज़ार का जुर्माना तेजस्वी पर लगा देता तो नीतीश जी नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा मांग लेते। हैं ना नीतीशजी?”

मामला ये हैं की जेएनयू के रिसर्च स्कॉलर रहे अतुल कुमार सिंह ने कॉपीराइट एक्ट के वॉयलेशन के मामले में नीतीश कुमार के खिलाफ हाईकोर्ट में केस किया हैं और अतुल का आरोप हैं कि पटना के ‘एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के सेक्रेटरी शैवाल गुप्ता द्वारा पब्लिश की गई किताब उनके रिसर्च का चोरी किया हुआ एडिशन हैं इस किताब को २००९ में नीतीश कुमार के नाम से छापा गया था. नीतीश ने शुक्रवार को कोर्ट से आरोपी के तौर पर उनका नाम हटाए जाने की गुजारिश करते हुए नीतीश ने कहा कि उनके खिलाफ कोई केस नहीं बनता और गलत इरादे के साथ शर्मिंदा करने के लिए केस में नाम जोड़ा गया. हालांकि, कोर्ट ने नीतीश की अपील खारिज करते हुए उनपर २० हजार रूपए का जुर्माना लगाने का ऑर्डर दिया वही ज्वाइंट रजिस्ट्रार संजीव अग्रवाल ने सुनवाई के दौरान कहा की ”शिकायतकर्ता को प्रतिवादी चुनने का हक हैं जेएनयू के दो सुपरवाइजरों ने सर्टिफाई किया हैं कि ये रिसर्च अतुल कुमार की हैं और इसलिए केस जायज हैं और नीतीश कुमार की एप्लीकेशन ज्यूडीशियल प्रॉसेस का दुरुपयोग हैं इसे जुर्माने के साथ खारिज किया जाता हैं| खबर दैनिक भास्कर

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