धनतेरस

दियों का पर्व दीवाली से ठीक दो दिन पहले धनतेरस मनाया जाता हैं. इस वर्ष यह १७ अक्टूबर मंगलवार को मनाया जा रहा हैं. धनतेरस के दिन ख़रीददारी करना शुभ माना जाता हैं. फिर चाहे वो सोना-चांदी या इलेक्ट्रॉनिक सामान हो या फिर बर्तन हर कोई कुछ ना कुछ खरीदता जरूर हैं. क्या आपने सोचा हैं कि इसके पीछे वजह क्या हैं. कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही भगवान धनवंतरी सागर मंथन से उत्पन्न हुए थे इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना व मनाया जाता हैं.

भगवान धनवंतरी के उत्पन्न होने से ठीक दो दिनों के बाद देवी लक्ष्मी सागर मंथन से प्रकट हुईं और इसलिए दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता हैं और दीवाली के ही दिन श्री राम चन्द्र भी अपने १४ वर्षों का वंवाश समाप्त कर अयोध्या लौटे थे. सागर मंथन के दौरान धनवंतरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था और यही वजह हैं कि धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने की भी परंपरा हैं यदि वो चांदी या सोने का हो तो अति उत्तम परंतु इस दिन स्टील या चाँदी से बने बर्तन को भी खरीदना शुभ माना जाता हैं. ऐसी मान्यता भी हैं कि इस दिन चाँदी की वस्तु खरीदने से धन में कई गुणा वृद्धि होती हैं और इसके पीछे कारण यह माना जाता हैं कि यह चन्द्रमा का प्रतीक हैं जो शीतलता प्रदान करता हैं और इससे मन में संतोष रूपी धन का वास होता हैं|

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