पटना के आलोक तिवारी आल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव के तौर पे कार्यरत हैं और उन्होंने समय समय पर शैक्षणिक भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई और उन्हें अंजाम तक भी पहुचाने का निश्वार्थ प्रयाश किया गत वर्ष २०१५ में आलोक ने इसके मद्देनजर पटना हाई कोर्ट में अपील भी दर्ज कराइ थी हलाकि बी.सी.ई.सी.ई. पर बिहार प्रशासन की एस.आई.टी. होने के कारण कुछ निष्कर्ष ना निकल पाया जब भी बिहार में शैक्षणिक भ्रष्टाचार की बात होती है तो लोग बिहार के टैलेंट की दुहाई देने लगते हैं, बिहार की बदनामी की बात करने लगते हैं, लेकिन जो ऐसी बातें करते हैं वह खुद सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते वैसे बिहार सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षा में अन्य जगहों पे टाँप किए हुए क्षात्र क्यों नहीं टाँप करते बिहार मे टैलेंट की कमी नहीं है, लेकिन गेट, यू.पी.एस.सी. की परीक्षा यदि बी.एस.एस.सी. और बी.सी.ई.सी.ई. की तरह होती तो यह काबिल क्षात्र टॅाप नहीं करते सवाल टैलेंट का नहीं बिहार के सरकारी शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली पर है वही जो बड़े और निजी स्कूलों के हैं वह कुछ भी जुगाड कर लेते हैं लेकिन जो छात्र गरीब पिछड़े सरकारी स्कूलों से है उनका क्या होगा क्या गरीब छात्र इन शिक्षा माफिया और भ्रष्ट पदाधिकारियों के जाल में फंसते रहेंगे और उन तमाम ७० से ८०% गरीब पिछड़े छात्रों का भविष्य क्या अंधकार में रह जायेगा हम देखते है जब शैक्षणिक भ्रष्टाचार की बात आती हैं तो सभी अपने हाथ खड़े कर देते हैं लेकिन उन लोगों का ध्यान गरीब पिछड़े छात्रों पर नहीं जाता इसी पक्ष में आलोक तिवारी का सभी से आग्रह हैं की आप सभी बिहार में व्याप्त शैक्षणिक भ्रष्टाचार बी.एस.एस.सी./बी.सी.ई.सी.ई. और बी.एस.ई.बी. के मामले को जोर शोर से उठाये ताकि गरीब पिछड़े छात्रों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके बी.सी.ई.सी.ई. परीक्षा विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारी जो वर्षों से प्रश्नपत्र बेचने की हिमाकत उन्होंने की है उसका जबाव कौन देगा, समाज में उनके द्वारा बनें फर्जी डोक्टोरो  से आम जनता की जाने जाएगी उसका जबाब कौन देगा २००८ से लेकर २०१६ तक बी.सी.ई.सी.ई. बोर्ड  द्वारा करवाये गए सभी परीक्षाओं की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए ऐसा आलोक का कहना हैं | खबर आलोक तिवारी की कलम से

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