मणिपुर में बड़ा राजनीतिक बदलाव: राष्ट्रपति शासन खत्म, नई सरकार का गठन; उग्रवादियों संग मुठभेड़ तेज

मणिपुरमणिपुर में लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों के बीच बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य में एक वर्ष तक चले राष्ट्रपति शासन को हटा दिया गया है और भाजपा नेतृत्व ने नई सरकार का गठन कर दिया है। वाई. खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदल दी है।

🔹 नई सरकार का गठन और राजनीतिक संतुलन

राष्ट्रपति शासन समाप्त होने के साथ ही मणिपुर में नई राजनीतिक व्यवस्था लागू हो गई है। भाजपा नेता वाई. खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है।
राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए सरकार में दो डिप्टी मुख्यमंत्री शामिल किए गए हैं, जिनमें—

  • एक कुकी समुदाय का प्रतिनिधि

  • और एक नागा समुदाय का नेता

यह कदम समुदायों के बीच विश्वास बहाली और शांति प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

🔹 सुरक्षा बलों की कार्रवाई जारी

राज्य में राजनीतिक बदलाव के बीच सुरक्षा स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। चुराचांदपुर सहित कई इलाकों में सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ें जारी हैं।
हाल की एक बड़ी कार्रवाई में जवानों ने 4 उग्रवादियों को ढेर किया, जो प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
सुरक्षाबलों का कहना है कि उग्रवादी गतिविधियों को रोकने के लिए अभियान तेज़ किया गया है।

🔹 संघर्ष की पृष्ठभूमि

मणिपुर में मई 2023 से मेइतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच संघर्ष जारी है, जिसने राज्य में हिंसा, विस्थापन और उग्रवादी घटनाओं को बढ़ावा दिया।
राजनीतिक नेतृत्व की अनुपस्थिति और राष्ट्रपति शासन के कारण स्थिति का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। अब नई सरकार पर प्रदेश में सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बहाल करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

🔹 क्या है वर्तमान स्थिति?

नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य में प्रशासनिक प्रक्रियाएँ तेजी से बहाल हो रही हैं।
सुरक्षाबलों की कार्रवाई और राजनीतिक नेतृत्व की सक्रियता से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में स्थिति को स्थिर किया जा सकेगा।