गुजरात SIR अपडेट: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में 68 लाख वोटर्स हटाए गए | पूरी रिपोर्ट

Special Intensive Revision (SIR) के दौरान गुजरात में मतदाता सूची में बड़े बदलाव दर्ज किए गए हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 68 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह संख्या पूरे देश में सबसे अधिक है और गुजरात के कुल मतदाता आधार का लगभग 13–14% हिस्सा दर्शाती है।

गुजरात📉 गुजरात में इतने नाम क्यों काटे गए?

चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार हटाए गए मतदाताओं की प्रमुख श्रेणियाँ इस प्रकार हैं:

  • मृत मतदाता

  • डुप्लीकेट नाम

  • स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित लोग

  • घर-घर सत्यापन में पते पर उपलब्ध न होने वाले मतदाता

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन बनाना था, जिसके चलते इन श्रेणियों में भारी कटौती की गई।

⚠️ राजनीतिक विवाद भी बढ़ा

इस बड़े पैमाने पर हुए डिलीशन के बाद गुजरात में राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस, ने आरोप लगाया है कि कई जिलों में “चुनिंदा तरीके से” नाम हटाए गए हैं। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों के परिवारों के नाम बड़ी संख्या में सूची से गायब हैं।

चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह फिजिकल वेरिफिकेशन और नियमों के अनुसार की गई है। गलत हटाए गए नामों को क्लेम-ऑब्जेक्शन प्रक्रिया के जरिए वापस जोड़ा जा सकता है।

📊 Before–After आंकड़ा (राज्यस्तर पर अनुमानित संरचना)

  • SIR से पहले कुल मतदाता: ~5.1 करोड़

  • हटाए गए मतदाता: ~68 लाख

  • अंतिम सूची (अपडेट के बाद): ~4.4 करोड़

🗳️ चुनावों पर संभावित असर

गुजरात की कई सीटों पर 5–10% तक मतदाता संख्या कम हुई है, जिससे आगामी चुनावों में जीत-हार का समीकरण प्रभावित होने की संभावना है। खासकर अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा जैसे शहरों में डुप्लीकेशन और माइग्रेशन के कारण सबसे ज्यादा कटौती दर्ज की गई।