खालिद कल पटना के गांधी मैदान में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और इमारत ए शरिया ने ‘दीन बचाओ देश बचाओ’ के नाम पर लाखों मुसलमानों को गांधी मैदान में एकजुट किया. मुस्लिम उलेमाओं ने सांप्रदायिकता के नाम पर जमकर पीएम मोदी को कोसा और मुसलमानों की समस्या के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया. कार्यक्रम का तंबू उखड़ा भी नहीं था कि कार्यक्रम के संयोजक रहे खालिद अनवर उसी बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू की गोद में जाकर बैठ गए.

खालिद अनवर को एमएलसी के तोहफे से नवाजा

नीतीश कुमार ने खालिद अनवर को एमएलसी के तोहफे से नवाजा. इससे एक बार फिर साबित हुआ कि कौम-मिल्लत के नाम मुस्लिम आवाम अपने उलेमाओं के हाथ फिर शिकार बनी. देश का मुसलमान बार-बार अपने उलेमाओं के हाथ ठगा जा रहा हैं. जज्बाती नारे देने वाले उलमा मुसलमानों की भीड़ एकट्ठा करते और फिर किसी न किसी राजनीतिक दलों के साथ सांठगांठ करके बैठ जाते हैं. ये सिलसिला आजादी के बाद से जारी हैं.

शाहबानो के नाम पर आवाज उठाने वाले सांसद और मंत्री बने. लेकिन मुसलमानों की हालत जस की तस बनी रही. लेकिन मुसलमानों के नाम पर ठेकेदारी करने वाले दिन दूनी-रात चौगनी तरक्की करते गए. बीजेपी और मोदी के खिलाफ जहर उगलकर मुसलमानों की तालियां बटोरने का सिलसिला उलेमाओं द्वारा फिर शुरू हो गया हैं. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ देश भर में दीन बचाओ देश बचाओ कार्यक्रम लगातार कर रहे हैं.

कार्यक्रम की जिम्मेदारी खालिद अनवर को दी गई

इसी कड़ी में बिहार में रविवार को बड़ा कार्यक्रम किया गया. बता दें कि इस कार्यक्रम का बिहार कन्वेनर की जिम्मेदारी खालिद अनवर को दी गई थी. जबकि खालिद अनवर लंबे समय से दिल्ली में रह रहे हैं, बिहार की सियासत और मुसलमानों से उनका कोई नाता नहीं था. लेकिन वली रहमानी होने के नाते उन्हें जिम्मेदारी दी गई थी. जेडीयू के कई मुस्लिम नेताओं ने पर्दे के पीछे से इस कार्यक्रम की सफलता का तानाबाना बुनने का काम किया था.

बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा था कि  हमने चार साल इंतजार किया और सोचा कि बीजेपी संविधान के तहत देश चलाना सीख लेगी. मुसलमानों के पर्सनल लॉ पर हमला किया जा रहा हैं. हमें अपने लोगों और देशवासियों को बताना पड़ रहा हैं कि देश के साथ-साथ इस्लाम पर भी खतरा हैं. दीन बचाओ देश बचाओ के बारे में सीतामढ़ी के मो. रिजाज ने कहा कि बिहार में मुसलमान एकजुट हो रहे थे.

उपचुनाव में मुस्लिमों की एकजुटता का नतीजा रहा कि बीजेपी को उपचुनाव में हार मिली. मुसलमानों के नाम पर अपना हित साधने वाले उलेमाओं ने बिहार के मुसलमानों की भीड़ को एकजुट करके एक एमएलसी सीट के लिए जेडीयू से डील कर ली. दरभंगा से रहने वाले मो. राशिद ने कहा कि जनता दल यूनाइटेड की मिलीभगत से बिहार में साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ मुसलमानों की एकजुटता में सेंध लगाने का काम किया हैं.

नीतीश के बीजेपी के साथ जाने से मुस्लिम समाज नाराज

मुसलमानों के बीच विभाजन होने से नीतीश कुमार और बीजेपी दोनों मजबूत होंगे. क्योंकि नीतीश कुमार के बीजेपी के साथ दोबारा जाने से मुस्लिम समाज बहुत नाराज हैं. इसी मद्देनजर उन्होंने कुछ उलेमाओं के जरिए खेल किया हैं. गौरतलब हैं कि बिहार में इमारत ए शरिया सबसे बड़ा मुस्लिम संगठन माना जाता हैं. इमारत ए शरिया और जेडीयू के रिश्ते जगजाहिर हैं. जेडीयू के नीतीश कुमार का आरजेडी से नाता तोड़कर बीजेपी संग दोबारा जाना बिहार के मुसलमानों को हजम नहीं हो रहा हैं.

इसी के चलते मुसलमान आरजेडी के साथ जाता दिख रहा था. यही बात जेडीयू नेताओं के लिए परेशानी का सबब बनी हुई थी. ऐसे में दीन बचाओ देश बचाओ कार्यक्रम को जेडीयू ने पर्दे के पीछे से सपोर्ट करने की रणनीति बनाई. ये बात तब उस समय हकीकत साबित हुई जब कार्यक्रम के बाद ही नीतीश कुमार ने दीन बचाओ देश बचाओ के कन्वेनर खालिद अनवर को एमएलसी बनाने की घोषणा कर दी| खबर आजतक

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