-Harsh Raj

भोजपुरी फिल्म जगत की परचित हस्तिओं में से एक हैं बिपिन सिंह अपना किरदार निभाने में माहिर और फ़िलहाल दूरदर्शन के एक शो में भी दिख रही हैं इनकी अदाकारिओं की झलकियाँ 

ये नाम बनाने के पीछे की वो मशक्त १९८३ में रंगमंच द्वारा शुरू किया मैंने और मेरे मित्र संजय उपाध्याय जी ने और हमारी एक रंगमंच की संस्था भी हैं निर्माण कला मंच जो की बिहार की एक धरोहर हैं वैसे मैं सुरु से बड़े थेथर किस्म का व्यक्ति हु हलाकि मेरी वाइफ इंडस्ट्री में पहले से ही थी वो मुझे अक्सर कहा करती मुंबई चलो पर मैं कहता था जबतक बुलावा नहीं आएगा नहीं जाऊंगा बिना किसी काम के भले ही यहाँ पूरी जिंदगी गुजर जाए पर भगवान् की कृपा हुई मुझे रंजन सिंह जी का कॉल आया जो ज़ी टीवी पे रावण बना रहे थे उन्होंने मुझे उसमे रावण के साले मायावी के लिए कास्ट किया और बस मैं चल पड़ा मायावी बन मायानगरी

ये नाम और मुकाम हासिल करने के बाद की मेरी की देखिए मुंबई में रुकना और दाल रोटी चलाना ही बहुत बड़ी बात हैं शुरुआत में रावण सीरियल के बाद थोड़ा ठहराव आया दिक्कते हुई घर पे भी नहीं बताता था क्यों की वहा पे भी बच्चे थे कही उन्हें न परेशानी हो फिर धीरे धीरे कुछ काम मिलने लगे दाल रोटी चलने लगी अच्छे पहनावे आने लगे बस सोच यही हैं कि जहाँ रहो सादगी और मेहनत से काम करो सफल रहोगे

अब तक ज्यादातर सिर्फ निगेटिव रोल्स ही क्यों ?

रंगमंच के दौरान काफी बड़ी बड़ी हस्तियों के साथ काम किया जो दिग्गज माने जाते हैं इस क्षेत्र के और हर तरह के किरदार भी निभाए और अभी भी बखूबी निभा सकता हु पर होता क्या हैं कि फिल्म इंडस्ट्री में बहुत से लोग मिल के आपका किरदार तय करते हैं आपके पर्सनालिटी, स्टाइल और आपके हाव भाव के हिसाब से की इस के लिए कौन सा किरदार सही रहेगा वो तय करते हैं और हमे निभाना होता हैं उसे और ज्यादा निगेटिव रोल्स ही किए तो एक निगेटिव एक्टर की मुहर लग गई तो ज्यादा निगेटिव रोल्स ही मिले पर बिच बिच में पोसिटिव और कॉमेडी रोल्स भी निभाएं हैं जब जैसा मौका मिला

भोजपुरी फिल्म जगत का एक दौर देखा हैं आपने उस समय से अब तक के बदलाव ?            

बहुत से बदलाव आए स्थितियों में उतार चढ़ाव हुआ बहुत से टेक्निकल बदलाव भी हुए नए नए लोग आए उनके साथ नए तरीके भी आते रहे जरुरी होता हैं समय के साथ बदलाव जो भी हैं अच्छा रहा होना भी चाहिए नहीं तो इंसान ऊबने भी लगता हैं एक ही तौर तरीके में

भोजपुरी एक नई ऊंचाइयों की ओर हैं विश्व प्रशिद्ध हो रहा हैं तो और क्या अहम बदलाव जरुरी हैं ? 

देखिए बदलाव एक अहम जरुरत हैं समय के साथ और हो भी रहा हैं हमने अपने कदम विदेशो के तरफ भी किए हैं और अपनी पहचान बनाई हैं पर एक कड़वा सच ये भी हैं कि भोजपुरी फिल्मों को भोजपुरी भाषी जनता से पूरा प्यार व सहयोग नहीं मिलता जितना मिलना चाहिए उनकी आबादी उनकी संख्या के हिसाब से बहुत ही खामियां दिखती हैं उनसभी को भोजपुरी फिल्मों में और उससे बड़ी खामियां जो की हॉलीवुड और बॉलीवुड में होती हैं उसे वही लोग बड़ी ही सहजता के साथ पचालेते हैं यदि भोजपुरी भाषी दर्शको का प्यार और सहयोग उनकी तादात के हिसाब से मिले तो हमारी फिल्मे और भी अच्छी साफ सुथरी और धमाकेदार बन सकेगी ये तो कुछ ऐसे दिग्गज हैं भोजपुरी जगत में जो आज इसकी बाग़ डोर संभाले हुए इसे जिन्दा रखा हैं वरना ये भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री बंद हो चुकी होती

युतो आज अक्षरा जी भोजपुरी जगत में बुलंदियों पे हैं पर एक पिता होने के नाते क्या आप मानते हैं कि वो अपनी अदाकारी में परफेक्ट हैं ?

अक्षरा जब से पैदा हुई वो संगीतमय माहौल में पली बढ़ी और बड़ी बड़ी हस्तियों की गोद में खेली वैसे फिल्म इंडस्ट्री में आने का उसका कोई प्लान नहीं था वो तो मैं रवि किशन जी और बबलू सोनी जी के साथ बैठा था और एक फिल्म की बात चल रही थी और एक्ट्रेस की तलाश थी तभी मैंने कहा कि सर मेरी बेटी हैं उचित लगे तो उसे मौका दीजिए फिर मैंने उसे बताया वो राजी नहीं थी मैंने उसे डाटा भी वो रोइ पर मेरी बात रखी एक दो फिल्में यूही की फिर धीरे धीरे परफेक्ट हो गई गाइडेन्स के लिए मैं था रवि किशन जी थे मैंने उसे हमेसा बेटा ही कहा और आज भी कहता हूं मेरी ख्वाइश थी की मेरा बच्चा सब कुछ जाने उसने बहुत कुछ सीखा सिंगिंग, डांसिंग, ड्राइविंग, स्विमिंग, और भी बहुत कुछ

आगे की फ्यूचर प्लानिंग्स प्लानिंग कुछ खास नहीं बस दाल रोटी चलती रहे फिल्मे मिलती रहे और भगवान् का आशीर्वाद हो खुद प खुद कुछ बड़ा हो जाएगा वैसे अब आप मुझे एक धारावाहिक में भी देख सकते हैं

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