अचानक कुछ नहीं होता सब्र के साथ मेहनत करना होता हैं : राजीव मिश्रा

राजीव मिश्रागंगा पे प्रशारित होने वाले कार्यक्रम ‘भक्ति सागर’ में अपनी प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध हैं राजीव मिश्रा

कब और कैसे हुई शुरुआत पढ़ाई के दौरान खर्च वहन करने के लिए मीडिया ज्वाइन किया एडिटिंग का सहारा लिया और उसमें मुझे ५०० मिल जाते थे जो आज के पांच लाख के बराबर हैं उसी दौरान नज़मा हिबतुला जी से मुलाकात हुई और मेरा पहला एडिट किया हुआ प्रोग्राम आया चित्रहार और उसके बाद बस चल पड़ा | फिल्म इंडस्ट्री में आने का ख्याल कहा से आया बैंगलोर से हैदराबाद आया  २००१-०२ में जब ईटीवी की शुरुआत हुई और मुझे उसे हेड करने का मौका मिला फिर मैं पटना पहुंचा और लंबे समय तक वहा काम किया और थिएटर से जुड़ा रहा था तो अभिनय से भी एक लगाव था और उस समय की संभावनाओं को देख के लगा की अभी मौका हैं और दिमाग में एक खयाल आया की पानी कितना भी मीठा क्यों न हो यदि रुका रहेगा तो खराब हो ही जाएगा तो मैं यहाँ से नहीं निकला तो यही रुक के रह जाऊंगा इसी दौरान लखनऊ के एक प्रोड्यूसर थे कुंवर राम सिंह जी अचानक उनकी एक फिल्म का ऑफर आया ‘नेहिया सनेहिया’ और उस दौर में काफी लंबे समय के बाद आशा भोश्ले जी ने उस फिल्म में अपनी आवाज़ दी और हमारे आकाशवाणी के मित्र केवल जी का म्यूजिक था तो उसके बाद लगा की अब आगे बढ़ना होगा और अभी संघर्ष नहीं किया तो कब करेंगे बस फिर मैं करता चला गया और मौका भी मिलता गया मुश्किलें बहुत आई पर उनका सामना किया और आगे बढ़ा बस |

राजीव मिश्राइनकी गायकी की मिठास का आनंद ले इस लिंक पे

सबसे पसंदीदा शो या फिल्म फिल्म ‘दूल्हा फुके चूल्हा’ उसमे बड़ा मजा आया और इन सब में से बिग गंगा पे प्रशारित  ‘भक्ति सागर’ कार्यक्रम करना मुझे बहुत पसंद हैं कितना भी व्यस्त रहु भक्ति सागर के लिए समय जरूर निकालता हु और लोगो से इस कार्यक्रम द्वारा मेरी तारीफ भी सुनने को मिलती हैं तो और भी अच्छा लगता हैं | कलाकारों के साथ काम करने में सहजता महसूस की देखिए मैनेज करना होता हैं मेरी जिम्मेदार हैं कि मैं अपने से नए कलाकारों को कम्फ़र्टेबल करू मेरे सीनियर्स हमें, मुझे याद हैं जब मैं के.बी.सी. के शूट पे जाता था तो अमित जी अपने साथ काम करने वाले सभी लोगो को से इतना घुल मिल जाते थे और उन्हें इतना सहज कर देते हैं कि आपको महसूस ही नहीं होगा की आप सदी के महानायक के साथ काम कर रहे हैं तो देखिए इस कदर काम होता चला जाता हैं नए हो या पुराने सभी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं पर एक बार ‘दूल्हा फुके चूल्हा’ के समय टिंकू तलसानिया जी खैर वो एक अच्छे कॉमेडी कलाकार हैं उन्हें भोजपुरी समझ नहीं आती थी तो वो पूछते थे और शूट के बीच में भी पूछ देते थे वो एक लम्हा याद हैं वैसे अच्छा लगता हैं उनके साथ काम करके मज़ा आया |

पर्सनल लाइफ पिता जी आदित्य बिड़ला ग्रुप में हैं पढ़ाई लिखाई वही से हुई और खुश किस्मत हु की दिल्ली था शायद वहा न होता तो आज यहाँ तक ना पहुँच पाता हलाकि माता जी अब हमारे बीच नहीं हैं पर उनका बहुत सपोर्ट रहा और उन्हें मिस करते हैं हम सभी | युथ को सन्देश आज की नई पीढ़ी बहुत ऊर्जा वान हैं पर चाहती हैं कि पलक झपकाते ही कोई काम हो जाए तो ऐसा नहीं होता सब्र के साथ मेहनत करना होता हैं और वो डायलॉग हैं न की काबिल बनो कामयाबी तो झक मारके आपके पीछे आएगी तो करिए होगा क्यों नहीं सफलता मिलेगी | साक्षात्कार हर्ष राज द्वारा

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