पूरा मामला आखिर क्यों हुआ एससी/एसटी एक्ट में बदलाव

एससी/एसटी एक्ट में बदलाव
भास्कर गायकवाड़

बीती २ तारीख को देश में हुआ दलित संगठन का बारात बंद क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव किया और जिस आदेश को लेकर सोमवार को पूरा देश जल उठा और एससी/एसटी ऐक्ट में बदलाव पुणे के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में स्टोर कीपर का काम करने वाले दलित भास्कर गायकवाड़ की याचिका पर दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव किया और पूरा देश जल उठा

गायकवाड़ पुणे कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में स्टोर कीपर हैं और उन्होंने २०११ में अपने तीन उच्च अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करवाया था. गायकवाड़ ने आरोप लगाया था कि तीनों उच्च अधिकारी उन्हें प्रताड़ित करते हैं. दरअसल गायकवाड़ का आरोप हैं कि उनके तीन वरिष्ठ अधिकारि किशोर बुराडे, सतीश भीसे और सुभाष महाजन ने २००९ में विभाग में भ्रष्टाचार किया था और गायकवाड़ को इस बात का पता लग गया था.

इसके बाद तीनों अधिकारी गायकवाड़ पर भ्रष्टाचार की बात छिपाने का दबाव बनाने लगे. लेकिन गायकवाड़ ने जब उनका भ्रष्टाचार छिपाने में मदद देने से मना कर दिया तो वे गायकवाड़ को प्रताड़ित करने लगे. आखिरकार अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर गायकवाड़ ने २०११ में दलित एट्रोसिटीज एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करवाया. इसके बाद तीनों अधिकारी गायकवाड़ पर प्राथमिकी वापस लेने का दबाव बनाने लगे.

गायकवाड़ का आरोप हैं कि २०११ से २०१६ तक पुलिस भी अधिकारियों का ही साथ देती रही. इसलिए गायकवाड़ ने २०१६ में दोबारा उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया. अब की बार तीनों अधिकारियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली. लेकिन हाईकोर्ट ने अधिकारियों की याचिका खारिज कर दी.

इसके बाद आरोपी अधिकारियों में से सुभाष महाजन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर गायकवाड़ पर दलित एट्रोसिटीज एक्ट के दुरुपयोग का आरोप लगा दिया और कहा की ‘एससी/एसटी एक्ट में बदलाव’ की जाए. सुभाष महाजन की इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने २० मार्च को जांच अधिकारी को आदेश दिया कि दलित एट्रोसिटीज ऐक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करने से पहले तफ्तीश की जाए और प्रारंभिक जांच में शिकायत वाजिब पाए जाने के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही दलित एट्रोसिटीज एक्ट यानि एससी/एसटी एक्ट में बदलाव की बात भी कही. सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ सोमवार को दलित संगठनों ने देशव्यापी बंद का आह्वान किया था. हालांकि दलितों का यह भारत बंद हिंसक हो गया. उपद्रवियों ने देशभर में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की.

इस देशव्यापी हिंसा में १० लोगों की मौत भी हो गई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा के सामने रखा, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया हैं| खबर आजतक

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