राष्ट्रगान से हटा देना चाहिए ‘सिंध’ के नाम को : कांग्रेस सांसद

राष्ट्रगान

हम सभी के मन में हमारे देश के राष्ट्रगान के प्रति आदर और सम्मान का भाव रहता हैं, लेकिन कांग्रेस के एक सांसद ने कई साल पहले लिखे गए राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ में बदलाव की मांग की हैं. कांग्रेस के सांसद रिपुन बोरा इसके लिए राज्यसभा में एक प्राइवेट मेंबर बिल भी लेकर आए हैं. असम से आने वाले बोरा की मांग हैं कि राष्ट्रगान से सिंध शब्द को हटाकर इसमें ‘उत्तर पूर्व’ शब्द जोड़ा जाना चाहिए.

उनकी दलील हैं कि सिंध इस वक्त भारत का हिस्सा भी नहीं हैं और अब यह इलाका पाकिस्तान में आता हैं, ऐसे में हमारे राष्ट्रगान से इस शब्द को हटा देना चाहिए. प्रस्ताव में बोरा ने कहा हैं कि भारत के महत्वपूर्ण भूभाग उत्तर पूर्व का राष्ट्रगान में कोई जिक्र नहीं हैं, ऐसे में सिंध की जगह ‘उत्तर पूर्व’ शब्द को राष्ट्रगान में जोड़ा जाना चाहिए. समाचार समूह ‘आजतक’ से बातचीत में बोरा ने कहा की, ‘राष्ट्रगान सारे हिंदुस्तान को एक साथ सम्मान देने की बात हैं,

जब संविधान सभा में राष्ट्रगान पारित हुआ था तब उसी वक्त पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इसमें वक्त के साथ बदलाव की बात की थी.’ इसी का हवाला देते हुए बोरा ने राष्ट्रगान में बदलाव की मांग की हैं. प्राइवेट मेंबर बिल में कहा गया हैं कि हमेशा भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले पाकिस्तान के भूभाग सिंध के नाम को राष्ट्रगान से हटा देना चाहिए. इसके लिए बोरा ने अन्य दलों के सांसदों से भी बात की हैं और उनसे समर्थन करने की अपील भी की हैं.

बोरा ने उम्मीद जताई कि अगले शुक्रवार को जब यह बिल सदन में आएगा तो इसपर चर्चा के जरिए कोई समाधान जरूर निकल सकता हैं. नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर ने साल १९११ में ‘जन-गण-मन’ लिखा था. उस वक्त भारतीय क्षेत्र पश्चिम में बलूचिस्तान से लेकर पूर्व में सिलहट तक फैला था. हालांकि, बंटवारे के बाद इन इलाकों का काफी हिस्सा पाकिस्तान में चला गया और कुछ बांग्लादेश में शामिल हो गया| खबर आजतक

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