लालू ने सजा में रियायत हेतु अदालत में पेश की ऐसी दलीलें

अदालत

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव जब तक सत्ता में रहे तो कभी भी जेल के हालात के बारे में नहीं सोचा और अब जब वह देवघर चारा घोटाले मामले में जेल में सजा काट रहे हैं, तो उन्हें वहां एक के बाद एक दिक्कतें दिखाई दे रही हैं जिसकी शिकायत कोर्ट में कर रहे हैं. साल १९९० से १९९४ के बीच देवघर कोषागार से पशु चारे के नाम पर अवैध ढंग से ८९.२७ लाख रुपए निकालने का दोष हैं. तब लालू यादव ही बिहार के मुख्यमंत्री थे. हालांकि, ये पूरा चारा घोटाला ९५० करोड़ रुपए का हैं, जिनमें से एक मामला देवघर कोषागार से हुआ केस हैं. लालू अब जेल में हैं और वह वकील के सहारे जज साहब से अनुरोध कर रहे हैं कि उन्हें सजा कम दी जाए क्योंकि जेल में वो सुविधाएं नहीं हैं, जिसके वह अभ्यस्त रहे हैं.

हालांकि चारा घोटाले के मामले में शुक्रवार को भी सजा का ऐलान नहीं हुआ. अब यह सजा शनिवार को दोपहर सुनाई जाएगी. खास बात यह हैं कि कम सजा पाने के लिए वो खुद और उनके वकील एक के बाद एक ऐसी दलीलें पेश कर रहे हैं जिस पर किसी को हंसी ही आ सकती हैं. अगर उन्होंने सत्ता में रहने के दौरान इन कमियों को दूर करने की कोशिश की होती तो आज उन्हें यह शिकायत नहीं करनी पड़ती. जेल को लेकर लालू की शिकायतें खत्म नहीं हो रही थी. आज कोर्ट में फैसला आने से पहले लालू की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी हुई. लालू की तरफ से वकीलों ने कम सजा दिलाने के लिए कुछ और बहाने किए. वकील की ओर से पेश दलील में कहा गया कि उन्हें किडनी की बीमारी हैं, डायबिटीज के मरीज हैं और उनके दिल का ऑपरेशन भी हो चुका हैं.

इसलिए उन्हें कम से कम सजा दी जाए और शायद वकीलों को लगा कि मामला बनता नहीं दिख रहा तो अब उन्होंने जेल की अव्यवस्था के बारे में शिकायत करने का दांव चला. वकीलों की अगल दलील थी, बिरसा मुंडा जेल में इन्फेक्शन होने का डर हैं इसलिए उनके स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें कम सजा दी जाए. उनकी ओर से सबसे अनोखी दलील थी कि जेल में शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं हैं, इससे उनकी किडनी पर असर पड़ सकता है. इससे पहले रांची स्थित विशेष सीबीआई अदालत से राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू यादव ने उस समय शिकायत की कि जेल में ठंड बहुत हैं जब जज ने उनसे पूछा कि कोई दिक्कत तो नहीं हैं. लालू का जवाब सुनकर जज ने कहा, तो तबला बजाइए| खबर आजतक

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