हित साधने का मंच न बनाये संसद को : वेंकैया नायडू

संसद

शनिवार को उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि संसद को राजनीतिक रूप से अपना हित साधने का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए. नायडू ने कहा की राजनीतिक दलों के लिए गंभीर आत्मचिंतन करने का समय आ गया हैं कि वे संसद को अपनी पार्टी को खुश करने के लिए हो-हल्ला मचाने का मंच नहीं बनाएं. उपराष्ट्रपति ने आगे कहा की देश में शांति, प्रगति और समृद्धि लाने के लिए प्रभावी व पूरी जवाबदेही से सांसद का काम-काज चलाना सुनिश्चित करने के सिवा दूसरा विकल्प नहीं हैं.

कलकत्ता चेंबर ऑफ कॉमर्स के १८७वें सालाना समारोह के मौके पर भारत में संसदीय लोकतंत्र को पुनरुज्जीवित करने के विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए नायडू ने संसद के काम-काज पर चिंता जाहिर की. दरअसल, संसद सदस्यों समेत विविध समूहों द्वारा सांसद के काम-काज को लेकर आलोचना होने लगी हैं. नायडू ने कहा सांसद और राज्यों की विधानसभाओं में जिस तरीके से काम-काज को रहा हैं, उसको लेकर आलोचना उचित हैं. आलोचना की वजह हाल के दिनों में संसद के कार्य में हुए परिणात्मक व गुणात्मक ह्रास हैं.

उन्होंने संसद सत्र के दौरान हंगामे को लेकर चिंता जाहिर की, क्योंकि राजनीतिक दलों का अपने सदस्यों के ऊपर अंकुश नहीं होने की वजह से यह रोज-रोज का मसला बन गया हैं. उन्होंने कहा कि विगत वर्षो में विधायी काम-काज और राष्ट्रीय महत्व के अहम मसलों पर बहस के लिए दिए जाने वाले समय में कमी आई हैं. संसद की बैठकें जब कम दिनों के लिए होती हैं, उस समय भी अक्सर साधारण मुद्दों को लेकर शोरगुल व हंगामे के चलते सांसद अक्सर स्थगित करनी पड़ती हैं. नायडू ने कहा कि राजनीतिक दलों को महत्वपूर्ण मसलों पर सर्वसम्मति बनाने की जरूरत हैं, ताकि सांसद और विधानसभाओं का कीमती समय उन मुद्दों को लेकर बर्बाद न हो, जिनका हल बहस और बातचीत के जरिए ढूंढ़ा जा सकता हैं| खबर जी न्यूज़

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