केन्द्र की इन योजनाओं को पूरा करने में असफल बिहार सरकार

umaकेन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कल २ जून को पटना में प्रेस वार्ता के दौरान सिंचाई, गंगा एवं भू-जल तथा नदी प्रबन्धन पर कुछ इस प्रकार अपने विचार व्यक्त किए बिहार में गंगा पर हुई सिल्ट के लिए एक्सपर्ट कमेटी गठित हो चुकी हैं और उसे रिपोर्ट को स्वीकृत करने से पहले जल संसाधन मंत्रालय उसे अपने सचिव द्वारा ५ जून को मुख्यमंत्री बिहार के पास भेजेगा तथा मुख्यमंत्री बिहार के अनुरोध के अनुसार विषेषज्ञों का दल जल संसाधन सचिव के नेतृत्व में पटना से फरक्का तक निरीक्षण करेगा गंगा को गाद(सिल्ट) मुक्त करने की ये योजना भारत सरकार का पहला प्रयास हैं |

योजना को गंगा पर लागू करने के बाद अन्य नदियों पर भी लागू किया जा सकता हैं अंतरराष्ट्रीय स्तर के तकनीकी विषेषज्ञ इस समिति में शामिल हैं तथा इस रिपोर्ट को लागू करते समय सभी को भागीदारी करनी पड़ेगी जिसमें केन्द्र सरकार के कुछ विभाग तथा राज्य सरकार को मिलकर सामंजस्य से यह काम करना होगा २०१८ तक गंगा को निर्मल एवं सिल्ट मुक्त करने के संबंध में जब उमा भारती से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि “गंगा की निर्मलता के लिए मैंने १० वर्ष कहे हैं और जहां तक गंगा को गाद मुक्त करने की बात हैं यह सिर्फ जल संसाधन मंत्रालय का काम नहीं इसको अंतर्देशीय जलमार्ग विभाग, पर्यावरण मंत्रालय, राज्य सरकारें तथा जल संसाधन मंत्रालय भी मिलकर करेंगे इसकी समय-सीमा नहीं बताई जा सकती

गंगेबिहार में नमामि गंगे के अंतर्गत पुराने कार्यक्रम – ४४२ करोड़ की लगत से बेगुसराय, मुंगेर, बक्सर और हाजीपुर में – एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और सीवर लाइन का निर्माण हो रहा हैं जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा ७० फीसदी यानी की लगभग ३०९ करोड़ रुपए बिहार सरकार को दिए गए लेकिन राज्य सरकार किसी भी प्रोजेक्ट को समय पर पूरा नहीं कर पाई नए स्वीकृत प्रोजेक्ट पटना के बेउर, सैदपुर, करमलीचक और पहाड़ी में लगभग १८३४ करोड़ रुपए की लागत से एसटीपी तथा सीवरेज लाइन का कार्य निर्माण के विभिन्न स्टेजों में हैं इसमें २०० एसएलडी का एसटीपी और लगभग ७०० किलोमीटर का सीवर नेटवर्क शामिल हैं इन परियोजनाओं के लिए भी केन्द्र द्वारा धन आवंटन किया जा चुका हैं लेकिन बिहार सरकार इन योजनाओं को समय से पूरा कराने में विफल हैं |

नमामि गंगे के अन्य नए प्रोजेक्ट :-

सुल्तानगंज - १२ एमएलडी का एसटीपी - ५५ करोड़
मोकामा - ९ एमएलडी का एसटीपी - ६१ करोड़
दीधा - १२८ एमएलडी का एसटीपी - १००० करोड़
कंकड़बाग - ६० एमएलडी का एसटीपी - ६०० करोड़
बाढ़ - ११ एमएलडी का एसटीपी - ६१ करोड़
मुंगेर - २७ एमएलडी का एसटीपी - ३४५ करोड़
भागलपुर - ७२ एमएलडी का एसटीपी - ४०४ करोड़

 

 

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