भारत के इस स्टेडियम पे हैं सूर्य देव की घनघोर कृपा

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार टेस्ट मैचों की सीरीज का तीसरा मुकाबला पूर्व कप्तान एमएस धोनी के होम टाउन रांची में खेला जा रहा है पहली बार रांची में कोई टेस्ट मैच हो रहा है और ‘जे एस सी ऐ’ स्टेडियम की सबसे बड़ी खासियत इसकी डिजाइन है। ये देश का पहला ऐसा स्टेडियम है जहां किसी भी परिस्थिति में शाम ४.४५ से पहले मैदान में बने सभी ९ पिचों पर छाया नहीं पड़ती जिससे खिलाडिओं की परेशानी काफी कम होती है यह स्टेडियम २०१२ फरवरी में बनकर तैयार हुआ और उसी साल अक्टूबर में आईसीसी ने इसे इंटरनेशनल मैच के लिए मान्यता दे दी अगस्त में ही यह तय हो गया था कि इस ग्राउंड पर इंडिया और इंग्लैंड के बीच १९ जनवरी, २०१३ को वनडे मैच खेला जाएगा, लेकिन उसके लिए इस स्टेडियम को आईसीसी से मान्यता मिलनी जरूरी थी। इसीलिए बीसीसीआई की रिक्वेस्ट पर आईसीसी ने डेविड बून की अध्यक्षता में स्टेडियम के इंस्पेक्शन के लिए एक टीम भेजी और बून को स्टेडियम में मौजूद फैसिलिटीज, सिक्योरिटीज, लोकेशन और सबसे खास बात कन्सट्रक्शन इतना पसंद आया कि उन्होंने एकबार में ही स्टेडियम के फेवर में रिपोर्ट सौंपी और आईसीसी ने इंटरनेशनल मैच के लिए मान्यता दे दी तब से अब तक यहाँ तीन वनडे और एक टी20 मैच भी हुए और अक्सर इसकी प्रैक्टिस पिचों पर लोकल मैचेज भी खेले जाते हैं |

मेन ग्राउंड में बनाए गए हैं इंटरनेशनल मैच के लिए ९ पिच ग्राउंड में इंटरनेशनल मैच के लिए ९ पिच बनाए गए हैं यानी किसी भी परिस्थिति में पिच से संबंधित कोई भी बाधा नहीं आ सकती। इतना ही नहीं, ग्राउंड पर प्रैक्टिस के लिए ८ पिच तैयार किए गए हैं। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि एकसाथ ८ बैट्समैन और बॉलर्स प्रैक्टिस कर सकते हैं। खबर दैनिक भास्कर

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