भागलपुर दंगे में आरोपी अश्विनी चौबे के बेटे ने किया सरेंडर

भागलपुर दंगे में आरोपी
हिंदू नववर्ष की शोभा यात्रा के दौरान भागलपुर के चंपानगर में दो पक्षों के बीच रोड़ेबाजी, आगजनी, फायरिंग की घटना हुई थी.

इस घटना में पुलिस जवान समेत कई लोग घायल हो गए थे और भागलपुर दंगे में आरोपी अर्जित शाश्वत ने शनिवार देर रात करीब १२ बजे पटना के महावीर मंदिर के सामने सरेंडर कर दिया. कोर्ट ने अर्जित की गिरफ़्तारी के लिए २४ मार्च को वारंट जारी किया था. अपने समर्थकों की मौजूदगी में सरेंडर के दौरान भागलपुर दंगे में आरोपी अर्जित ने मीडिया के सामने नारेबाजी की

और इससे पहले सरेंडर न करने की वजह भी बताई. इसी दौरान एएसपी राकेश दुबे मौके पर पहुंचे और उन्हें भीड़ के बीच से भागलपुर दंगे में आरोपी रहे अर्जित को अरेस्ट कर लिया. बता दें कि शनिवार शाम करीब साढ़े पांच बजे भागलपुर के कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी. उसके खिलाफ नाथनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई हैं. अर्जित ने भागलपुर हिंसा के लिए वहां के विधायक को दोषी ठहराया. भागलपुर दंगे में आरोपी अर्जित केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे का बेटा हैं.

अर्जित ने कहा कि वे अभी तक कोर्ट की शरण में थे. अब कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी हैं. इसलिए वह सरेंडर कर रहे हैं. अर्जित ने बवाल के लिए भागलपुर के विधायक को जिम्मेदार बताते हुए कहा की, मैं एक ही बात जानता हूं कि भागलपुर में १० दिनों से जो गतिविधि हो रही हैं, उसके लिए विधायक शर्माजी जिम्मेदार हैं. विधायक के फोन का रिकॉर्ड निकाल लीजिए तो पता चल जाएगा कि कौन दंगाई हैं. शोभायात्रा निकालने के बाद नाथनगर थाना का रवैया आपत्तिजनक रहा.

हमारे जैसे राष्ट्रभक्तों की भावना ‘भारत माता की जय, वंदे मातरम और जय श्रीराम’ कहने की थी. गिरफ्तारी के बाद अर्जित को गांधी मैदान थाना ले जाया गया. वहीं, भागलपुर के एसएसपी मनोज कुमार ने कहा की जमानत याचिका खारिज होने और कोर्ट में कुर्की का आवेदन देने से अर्जित पर दबाव बढ़ा, जिसके चलते पुलिस को कामयाबी मिली. भागलपुर और पटना पुलिस की संयुक्त टीम की कोशिश से यह मुमकिन हो सका हैं.

पुलिस अर्जित को भागलपुर के सीजेएम कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजेगी. फिर वे बेल के लिए सीजेएम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सकेंगे. यहां से राहत नही मिलने पर वे जिला अदालत में अर्ज़ी डालेंगे. अगर यहां भी राहत नहीं मिलती हैं तो वे हाईकोर्ट का रुख ले सकते हैं. इन प्रक्रियाओं को वो एक हफ्ते में पूरी कर सकते हैं, ताकि केस जल्दी हाईकोर्ट में पहुंचे और जल्द जमानत मिल जाए| खबर दैनिक भास्कर

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