‘राखी’ एक बहन ऐसी भी जिसने भाई के इंतजार में दे दी जान

राखीये संभव नहीं की राखी का त्यौहार हो और रानी कर्णावती का जिक्र ना हो, राणा सांगा की पत्नी कर्णावती एक राजपूत रानी थी, जिन्‍होंने जौहर में जान दे दी, पर घुटने नहीं टेके दरअसल, चित्तौड़ के शासक महाराणा विक्रमादित्य को कमजोर समझकर गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह ने राज्‍य पर आक्रमण कर दिया था.

इस मुसीबत से निपटने के लिए कर्णावती ने सेठ पद्मशाह के हाथों हुमायूं को राखी भेजी थी. और राखी के साथ कर्णावती ने एक संदेश भी भेजा और उस संदेश में उन्‍होंने सहायता का अनुरोध करते हुए कहा था कि मैं आपको भाई मानकर ये राखी भेज रही हूं. लेकिन उन दिनों हुमायूं का पड़ाव ग्वालियर में था, इसलिए उसके पास राखी देर से पहुंची थी.

जब तक वे फौज लेकर चित्तौड़ पहुंचे थे, वहां बहादुरशाह की जीत और रानी कर्णावती का जौहर हो चुका था. राखी मिलते ही हुमायूं ने वहां से आगरा और दिल्ली संदेश भेजा और फौजें जुटाने का आदेश दिया. लेकिन जब तक वह फौजों को लेकर चित्तौड़ पहुंचा, देर हो चुकी थी. कर्णावती महल की सभी स्त्रियों के साथ जौहर कर चुकी थी| खबर आजतक

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